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सोमवार, 17 मई 2021

शिशुगीत : चाचा जी -डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'

चाचा जी  

डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
सांझ ढले कल मेरे चाचा,
आए हैं अजमेर से। 
बहुत थके हैं इसीलिए वे,
आज उठेंगे देर से। 
मेरे चाचा जी अफसर हैं,
खूब मजे में रहते हैं। 
मुझसा बनना है तो जमकर,

करो पढ़ाई कहते हैं। 

शिशुगीत : दौड़- डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'

दौड़  

शिशुगीत : डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'

सुबह सवेरे गया घूमने,
 भौंभौं कुत्ता  भाई । 
मिला राह में मोटू लोमड़
जमकर  दौड़ लगाई।  
रोज दौड़ने वाला भौंभौं,
जीत गया झट बाजी।
हरदम खाते रहने वाला,
मोटू हारा हां जी। 


शनिवार, 15 मई 2021

शिशुगीत "बच्चों की विनती" -डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'


                                                                                       
बच्चों की विनती
शिशुगीत : नागेश पांडेय 'संजय'

सभी यही कहते हैं, ईश्वर !
आप बहुत ताकत वाले हो।
सबकी ही विनती सुनते हो,
इस दुनियाँ के रखवाले हो।
जिसको देखो परेशान है,
सबके मन में हिम्मत लाओ।
हम बच्चों की विनती सुन लो,
कोरोना को दूर भगाओ।  

     

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

चालू लालू

शिशुगीत : डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
लालू जी शैतान बहुत हैं, 
चालू  भी हैं ये.
अपना काम बना लेते 
झगड़ालू भी हैं ये. 
मूंगफली मैंने दिलवायीं, 
दाने गटक गए.
मैंने मांगी मूंगफली तो
छिलके पटक गए 

सोमवार, 16 सितंबर 2013

शलजम

शिशुगीत : डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
शलजम की सब्जी न्यारी,
खाती है दुनियाँ सारी.
दादी तो कच्चा खातीं, 
दादा खाते तरकारी. 
शलजम मुझको भाती है, 
शलजम खून बढ़ाती है.
शलजम जो तुम खाओगे, 
लाल लाल हो जाओगे.  


मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

गुलगुले

शिशुगीत : नागेश पांडेय 'संजय' 

गुलगुले जी गुलगुले,
गुलगुले थे पुलपुले.
हमने खाए गुलगुले,

हम भी हो गए पुलपुले.

सोमवार, 7 नवंबर 2011

बहन हमारी

शिशुगीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

छोटी सी है बहन हमारी ,
करती हरदम शैतानी . 
कभी नाचती , कभी कूदती , 
कभी खेलती है पानी .

कभी पकड़ कर बाल नोचती , 
कभी फाड़ देती पुस्तक . 
डाटो तो सो जाती है पर , 
उठकर करती है बक-बक .

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

शिशुगीत : दादीजी का चश्मा

दादीजी का चश्मा खोया ,
                                 सबकी आफत आई .                                        

सब मिल खोज रहे हैं फिर भी
पड़ा नहीं दिखलाई .
दादी अपने सर पर देखो ,
मीना जब चिल्लाई .
राम राम फिर गजब हो गया
दादीजी शरमाई .

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

लारी लप्पा (शिशुगीत):डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'

लारी लप्पा 

छोटा सा अपना परिवार, 
पापा मम्मी करते प्यार. 
दीदी मेरी नेक भली, 
सभी प्यार से कहें लली. 
मम्मी चीजें नई बनाती, 
बड़े शौक से हमें खिलाती. 
बोलो आज बनाया क्या ? 
हाँ जी,  गाजर का हलवा. 
अब हम हलवा खायेंगे, 
लारी लप्पा गायेंगे. 
लेखक की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक 'लारी लप्पा' से साभार

शनिवार, 27 अगस्त 2011

तारे निकले

शिशुगीत:नागेश पांडेय'संजय'
आसमान में तारे निकले,
देखो,  कितने सारे निकले.
टिम-टिम करते आते हैं ,
अंधकार को खाते हैं .

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

ब्रेक-फास्ट


शिशुगीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

चालीस पूडी - बीस कचौड़ी , 
मिनटों में खा जाते हैं . 
इसीलिए तो मोटू भैया , 
पेटू जी कहलाते हैं . 
एक बार की बात इन्होंने , 
दही दस किलो खाया . 
बनी मजे की बात उसे जब , 
ब्रेक-फास्ट बतलाया. 

चित्र साभार ; गूगल सर्च 

बुधवार, 19 जनवरी 2011

शिशुगीत : चूँ-चूँ-चूँ बोल चिरौटे - नागेश पांडेय 'संजय'

चूँ-चूँ-चूँ बोल चिरौटे
शिशुगीत : डा. नागेश पांडेय 'संजय'
चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल चिरौटे,
चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल!

देख चिडै़या लाई दाना,
कुटुर-कुटुर कर अब तू खाना।
लेकिन मुँह तो खोल चिरौटे,
लेकिन मुँह तो खोल!

बड़े हो रहे पंख तुम्हारे,
उड़ने की कोशिश कर प्यारे!
आसमान में डोल चिरौटे,
आसमान में डोल!

चिड़िया ने है दही जमाया,
उसे भगौने में रखवाया।
जल्दी ढक्कन खोल चिरौटे,
जल्दी ढक्कन खोल!

चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल चिरौटे,
चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बोल!


                                         (देवपुत्र,मासिक, इंदौर के फरवरी 2008 अंक में प्रकाशित)

सोमवार, 17 जनवरी 2011

गुडिया कहाँ चली ?

 शिशुगीत: डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 
चित्र में : श्रुति 

अच्छी और भली गुडिया , 
बोलो कहाँ चली  गुडिया? 
 गुडिया आज चली स्कूल ,
मन में ख़ुशी रही है झूल , 
 गुडिया , तुम मन से पढना , 
जीवन में आगे बढ़ना . 

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

ऐसा भागा ऐसा भागा

 शिशु गीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

चित्र साभार :गूगल सर्च 

कड़ी ठण्ड में बिल्ली ने, 
थर्राता चूहा पकड़ा .
दस्तानें पहने पंजों में , 
कसकर उसको जकड़ा .

घर पहुँची  झट गैस जलाई , 
उस पर रखी कढाई. 
घी उड़ेल ठंडे चूहे को , 
डाला उसमे भाई .

गर्मी पाकर ठंडा चूहा , 
शेर बना  गुर्राया   . 
ऐसा  भागा ऐसा  भागा ,    
हाथ  नहीं  फिर आया . 

शनिवार, 11 दिसंबर 2010

शिशुगीत : नाच दिखा दो-डा. नागेश पांडेय 'संजय'


नाच दिखा  दो
शिशुगीत : डा. नागेश पांडेय 'संजय'  
बंदर मामा बड़े प्यार से 
बोले - भैया मोर. 
ता-ता थैया नाच दिखा दो , 
होता हूँ मैं बोर.
बोला मोर - ठीक है लेकिन 
हो जाने दो भोर.
सोओ और मुझे सोने दो , 
अब मत करना शोर. 

घुमक्कड़ पुल्लू

शिशु गीत : डा. नागेश पांडेय 'संजय' 


                                     एक बार की बात घुमक्कड़ पुल्लू , 
                           घुम्मी करते - करते पहुंचे  कुल्लू . 
                           पर कुल्लू की ठण्ड देख घबडाए , 
                           छींक मारते घर को वापस आए .

मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

चंदू मेरा नाम


 चित्र में आयुष शुक्ल 

चंदू    मेरा  नाम , 
पढना-लिखना काम . 
चाय  नहीं  पीता हूँ , 
खाता  हूँ   बादाम .
कसरत करता रोज ,
हँस कर देता 'पोज '.


रविवार, 5 दिसंबर 2010

चार दीदियाँ

शिशु गीत : डा. नागेश पांडेय 'संजय' 

विद्यालय में सात दीदियाँ , 
मुझे  पढ़ाती  हैं  . 
लेकिन चार दीदियाँ ही बस 
मुझको भाती हैं ,
बाकी तो गुस्सैल  बहुत हैं ,  
करती हैं डाँटा .  
कान उमेठा करती कसकर ,
जड़ देती चाँटा 

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

सूरज दादा



शिशु गीत : डा. नागेश पांडेय 'संजय' 


सूरज दादा कहो कहाँ से , 
रोज सुबह तुम आ जाते ? 
और शाम होते ही झट से , 
जाने  कहाँ चले जाते ? 
कहाँ तुम्हारे मम्मी-पापा
कहाँ तुम्हारा है घर ? 
बात करूँगा तुमसे , 
बोलो तो मोबाइल नंबर ?

शिशुगीत : भैया की गैया-नागेश पांडेय 'संजय'

शिशुगीत : नागेश पांडेय 'संजय'
अपलम चपलम ता-थैया, 
भैया ने पाली गैया.  
गैया का रंग भूरा लाल, 
नरम-मुलायम उसकी खाल. 
उसके संग एक बछड़ा,
दुद्धू पीता खड़ा - खड़ा. 
लोरी इसे सुनाओ माँ, 
जल्दी इसे सुलाओ माँ. 
दूध अगर पी जाएगा, 
हाथ नहीं कुछ आएगा.