आधुनिक बाल कहानियाँ
लेखक : नागेश पाण्डेय 'संजय'
प्रकाशक : दर्पण प्रकाशन, सदर बाजार, शाहजहांपुर,
संस्करण : 1995
पृष्ठ : 24, मूल्य : छह रुपया मात्र ।
समीक्षक : चक्रधर नलिन
समीक्ष्य पुस्तक में हिन्दी के समर्थं लेखक नागेश पाण्डेय 'संजय' की आधुनिक मनोविज्ञान प्रतिफलन पर आधारित छहू बाल कहानियां सम्मिलित है।
संग्रह की प्रथम कहानी 'नेहा ने की बाल सभा' तथा अन्तिम कहानी', 'सुनहरा पेन' बाल-मन पर अमिट प्रभाव डालती है । 'सुनहरा पेन' पाने की महत्वाकांक्षी बंटी के प्रयास, प्राप्ति पर सामाजिक प्रतिक्रिया, राजीव का भ्रमवश प्रतिकार और पश्चाताप आदि बाल समस्याओं पर प्रकाश डालती है।
यह क्या हो गया' कहानी में अप्रैल फूल बनाने के रोहित के काले कारन। में में आया यतीश अपने प्राणों से हाथ धो बैठता है। यह कहानी दुष्ट बालकों से सावधान एवं दूर रहने की शिक्षा देती है। पहली कहानी में बच्चों को सुन्दर संकल्पों से विशेष प्रेरणा मिलेगी। इसमें स्कूल प्रांगण में नेहा द्वारा आयोजित बाल सभा में बच्चे नई पुस्तकें खरीदने, अच्छो कविताओं की कतरने कापी पर लगाने के अपने सुन्दर कार्य सबको बताते हैं।
'संगति का असर' कहानी में प्रतिभावान बालक युधामन्यु के कुसंगति स्वरूप, उदार बालक दीपक के प्रयासों से उसमें जीवन-सम्मान के प्रति नई ललक जगती है। 'चिड़चिड़ापन दूर हुआ' में किशोरी नीतू द्वारा राजीव को डाक्टरों द्वारा गलत दवा से उसकी मृतक बहन को भूलकर 'खूब पढ़ो', डाक्टर बनो और ऐसा अस्पताल खोलो जिससे फिर गलत दवा का शिकार बन कर कोई मरीज तुम्हारी दीदी की तरह अकाल मृत्यु का भागी न बने' सन्देश उसके जीवन में परिवर्तन की लहर उत्पन्न करता है।
'कही ऐसा हो तो' एक शिक्षात्मक कहानी है जिसमें हकलाते नीरव के सुधरने और प्रवक्ता बनने तथा मजाक बनाने वाले प्रणव के तदनुरूप हो जाने की गाथा है।
सभी कहानियां दस से चौदह वर्षीय शिक्षा क्षेत्र के बाल पात्रों पर आधारित हैं ओर इस काल की बाल-समस्याओं पर केन्द्रित इन कहानियों का संसार रोचक परिणाम-प्रभाव दर्शन में सक्षम हैं। एक तारतम्य में बंधी ये पठनीय कथाएं बालकों में राष्ट्र के उत्तरदायी नागरिक बनने का भाव जाग्रत करेंगी। निश्चय ही, इस पुस्तक से बाल कथा साहित्य मे उल्लेखनीय संवृद्धि हुई है।
समीक्षक : चक्रधर 'नलिन'
प्रभु टाउन, रायबरेली
(लल्लू जगधर, मई 1996, पृष्ठ 38 पर प्रकाशित)



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