बालमन को प्रभावित करती 'नटखट बाल कहानियाँ'
समीक्षक : राजकुमार जैन राजन
समीक्ष्य कृति : 'नटखट बाल कहानियाँ'
लेखक : डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
प्रकाशक : अनुराग प्रकाशन, 4760-61, द्वितीय तल, 23-अंसारी रोड़, दरियागंज, नई दिल्ली- 110002
संस्करण : 2021
दूध, भोजन, खेल व जीवन रक्षक दवाएँ बालकों के लिए जितनी आवश्यक होती है उतनी ही आवश्यक होती हैं पुस्तकें। बच्चों का मन एक कोरे कागज जैसा होता है जिसपर लिखी गई इबारत को आसानी से नहीं मिटाया जा सकता है इसी तरह बाल मन पर जो कुछ अंकित हो जाता है वह अमिट स्थान बना लेता है। आज के परिवेश में बच्चे की जिज्ञासा का क्षितिज चाहे जितना बड़ा हो गया हो पर उसकी प्रारंभिक जिज्ञासा मूल रूप में अपरिवर्तित है। इसके लिए बालक के मनोविज्ञान को समझते हुए उसकी शिक्षा, दीक्षा, पठन, पाठन में बड़ी सावधानी रखनी चाहिए। बालकों के सुदृढ जीवन निर्माण में बाल साहित्य का प्रमुख स्थान है। विश्व के हर देश और हर भाषा में बाल साहित्य बहुतायत से लिखा जा रहा है। आज जो बच्चे अच्छा बाल साहित्य पढेंगें; वे ही कल इंजीनियर, वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ, सैनिक, व्यापारी, अधिकारी, साहित्यकार आदि बनेंगे। जिस प्रकार के आदर्श और नैतिक मूल्य हम उनके सामने रखेंगे, भविष्य में वही फलित होंगे। यदि हम बच्चों को श्रेष्ठ बाल साहित्य ही देंगे तो उन्हें अनेक दुष्प्रभावों से मुक्त रख सकते हैं।
अच्छी पुस्तकें बालकों के मानसिक क्षतिज को बढ़ाने में सहायक होती है तो दूसरी ओर उनकी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता में भी नए आयाम जोड़ती है। बच्चों के सम्यक विकास में स्वस्थ, मनोरंजक, सुरुचिपूर्ण, संस्कार सम्पन्न्न, ज्ञानवर्धक बाल साहित्य की उपादेयता एवं उपयोगिता निर्विवाद है। बाल साहित्य के ख्यातनाम रचनाकार डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' का
बेहतरीन बाल कहानी संग्रह " नटखट बाल कहानियाँ " प्रकाशित हुआ है जो उपरोक्त कसौटियों पर खरा उतरता है।
आज के बालक की रुचि, रुझान और बाल मनोविज्ञान पर अच्छी पकड़ रखने वाले शाहजहाँपुर निवासी डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' के बच्चों के लिए अनेक कहानी, कविता, एकांकी, पहेली संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं ; जिनमें 'आधुनिक बाल कहानियाँ', 'मोती झरे टप-टप', 'नेहा ने माफी मांगी', 'दीदी का निर्णय', 'छोटे मास्टर जी', 'कद्दू की दावत', 'अपलम चपलम', 'पीठ पर बस्ता', 'जो बुझे वो चतुर सुजान' आदि प्रमुख हैं। आपकी कई रचनाओं का पंजाबी, कन्नड़, गुजराती, मराठी, उड़िया, राजस्थानी, अंग्रेजी आदि भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। आपकी कई रचनाओं को स-सम्मान शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में भी सम्मिलित किया गया है। बाल साहित्य में शोध/आलोचना के क्षेत्र में भी आपने कई महत्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना की है। 'उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान', ' चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट, इंडिया', 'नेपाल बाल साहित्य समाज', ' भारतीय बाल कल्याण संस्थान', ' राजकुमार जैन राजन फाउंडेशन', 'साहित्य मण्डल', 'बाल साहित्य शोध केंद्र' जैसी अनेक ख्यातनाम संस्थाओं द्वारा श्रेष्ठ बाल साहित्य सृजन के लिए डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' सम्मानित किया हैं।
" नटखट बाल कहानियाँ " बाल कहानी संग्रह में डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' की बालकों को जीवन का पाठ पढ़ाती 28 प्रतिनिधि बाल कहानियों को संजोया गया है। 'खेल-खेल में' कहानी में बताया गया है कि बेमतलब किसी को परेशान नहीं करना चाहिए अन्यथा कभी भी मुसीबत खड़ी हो सकती है। 'मैं जाग रहा था' एक मनोरंजक कहानी है जो बालमन के नटखटपन को दर्शाती है।किसी मे यदि कोई शारीरिक कमी हो तो बार-बार उसका मजाक बनाने, चिढ़ाने से वही स्वयं की आदत बन जाती है। 'कहीं ऐसा हो तो?' कहानी में नीरव की हकलाने की आदत को लेकर प्रणव उसकी मजाक बनाता रहता और स्वयं हकलाते हुए बोलता। धीरे-धीरे यह उसकी आदत ही बन गई जो ठीक नहीं हो पाई और नीरव ने लगातार प्रयास कर अपनी हकलाहट को खत्म कर दिया और धारा प्रवाह बोलने लगा। 'उड़न तश्तरी' कहानी को इस संग्रह की सबसे अच्छी कहानी कहना चाहूंगा जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ही मानवता का सन्देश किस उत्कृष्ट अंदाज़ में देती है। इस कहानी का एक संवाद देखिए।एलियन सोनू को कहता है, *'क्योकि पृथ्वीवासियों को लड़ने -भिड़ने से ही फुर्सत कहाँ? आए दिन तो यहाँ दंगे-फसाद होते हैं।लोग खाली बैठ कर गप्पें लड़ाते हैं।एक दूसरे की बुराइयाँ खोजते हैं। जाति और धर्म के नाम पर जूझते हैं। हमारे ग्रह के हर वैज्ञानिक को खूब सुविधाएं हैं। .... आपकी पृथ्वी की तरह हमारे यहाँ ढेरों भगवान नहीं हैं। हमारे यहाँ सिर्फ एक ही भगवान है- विज्ञान। हम सब उसके बारे में ही सोचते हैं और कर्म को पूजा मानते हैं ... हमारे ग्रह पर पृथ्वी की तरह मानवों की जातियाँ भी नहीं होती .. हमारे यहाँ तो बस ... मानव जाति, पशु जाति, पक्षी जाति.. यह जरूर होता है ... आपकी आपकी पृथ्वी पर ऐसा कहाँ?'*
'काल करे सो आज कर' कहानी श्रम व समय की महत्ता बताती है तो 'नेहा ने माफी मांगी'एक नटखट बालिका की कहानी है जो अपनी हरकतों से सबको परेशान किया करती थी।एक दिन नेहा को ऐसा सबक मिलता है कि वह शरारतों से तौबा कर लेती है और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगती है। इसी तरह इस संग्रह की सभी कहानियाँ एक से बढ़कर एक श्रेष्ठ हैं। लेखक बालकों को सीधे सीधे कोई सीख नहीं देता है बल्कि स्वयं निर्देशक बनता है है और चरित्रों को उसी दिशा में मोडता जाता है, जिससे पाठक अपने आप कहानी के मन्तव्य को ग्रहण कर लेता है।इन कहानियों की भाषा सहज एवं सरल है जिनमें बाल सुलभ मस्ती है, रोमांच है, संवेदनाएं हैं, राष्ट्रीयता की भावना है विज्ञान का ज्ञान है, पर्यावरण संरक्षण की बातें हैं, कहानियों में कविताएँ हैं, सामाजिकता है, रिश्तों की महक है, जागरूकता है और है कोमल हृदय को प्रभावित करने वाली निर्मलता भी। कुल मिलाकर देखें तो 28 ही कहानियों में उतने ही मन भावन रंग हैं। ये कहानियाँ बच्चों का मनोरंजन ही नहीं करेगी बल्कि उनके शारीरिक व मानसिक विकास में भी सहायता करेगी। पुस्तक खूबसूरत सजिल्द आवरण पृष्ठ के साथ सुंदर चित्रों सहित प्रकाशित की गई है। सबकुछ उत्कृष्टतम होते हुए भी 136 पृष्ठ की किताब का मूल्य 450 रुपये रखना गले नहीं उतरता है। बहरहाल, इस खूबसूरत बाल कहानी संग्रह के लिए डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' को हार्दिक बधाई । यह पुस्तक बाल साहित्य जगत व पाठकों में सम्मान प्राप्त कर बाल साहित्य जगत में श्रीवृद्धि करेगी, मंगलकामनाएं !
◆ समीक्षक : राजकुमार जैन राजन
(दैनिक "दस्तक प्रभात", पटना, 13/02/2022)


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