पुस्तक समीक्षा
रोचक एवं ज्ञानवर्धक कृति :
श्रेष्ठ बाल पहेलियाँ
समीक्षक -घमंडीलाल अग्रवाल
हिन्दी बाल साहित्य की अनेकानेक विधाओं में पहेलियाँ, भी एक स्थापित विधा के रूप में हमारे सामने आती है। इस विधा का चलन हमारे आदिग्रंथ 'ऋग्वेद' से चला आ रहा है। डॉ. नागेश पांडेय 'सजय' द्वारा संपादित 'श्रेष्ठ बाल पहेलियाँ, एक रोचक एवं ज्ञानवर्धक कृति है। निःसंदेह संपादन का कार्य अत्यन्त कठिन व उबाऊ होता है, फिर भी पांडेय जी ने कुशलतापूर्वक इसका निर्वहन किया है।
श्रेष्ठ बाल पहेलियाँ में देशभर के 45 प्रतिष्ठित रचनाकारों की 290 पहेलियों का समावेश है। इस कृति की पहेलियों का श्रीगणेश अमीर खुसरो की पहेलियों से किया गया है। 'आकाश' पर लिखी उनकी पहेली कृति की पहली पहेली है, देखिए:- एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे मोती उससे एक न गिरे।
इस संपादित कृति में जिन रचनाकारों की पहेलियों को स्थान मिला है, उनमें प्रमुख हैं।- अंजीव अंजुम, अजय जनमेजय, गणेश दत्त सारस्वत, गोपीचन्द्र श्रीनागर, घमंडीलाल अग्रवाल, जयप्रकाश भारती, दीनदयाल शर्मा, डॉ. नागेश पांडेय संजय', डॉ. परशुराम शुक्ल, फहीम अहमद, बाबूलाल शर्मा प्रेम, महेश सक्सेना, मोहम्मद साजिद खान, राकेश चक्र, लक्ष्मी खन्ना सुमन, विनोद चन्द्र पाडेय विनोद, शिव अवतार रस्तोगी 'सरस,
श्रीप्रसाद, संदीप कपूर आदि। कृति में जीव-जंतुओं संबंधी योतियाँ देखने को मिलती हैं, जैसे:- कछुआ, हाथी, तितली, कौआ, मच्छर, कुत्ता, उल्लू, जिराफ, तोता, मकड़ी,गिलहरी, अँट, खरगोश, भालू, हंस, भेड़, छिपकली, जिराफ, जुगनु, बकरी, चूहा, दरियाई घोड़ा आदि । 'भेड़' पर लिखी डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' की पहेली है:-मेरी चाल कभी मत चलना, यहाँ बुद्धि का काम नहीं। रखूं पहाड़ों से मैं नाता, भैया अपना धाम वहीं ।
कुछ पहेलियाँ महापुरुषों पर आधारित हैं, जैसे:- लालबहादुर शास्त्री, एपीजे अब्दुल कलाम, चन्द्रशेखर आज़ाद, राजा राममोहन राय, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गाँधी, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचन्द्र बोस, भीमराव अंबेडकर, रानी लक्ष्मीबाई, चितरंजन दास, कालिदास व शाहजहाँ । 'चन्द्रशेखर आजाद' पर लिखी दीनदयाल शर्मा की पहेली की बानगी :-आज़ादी का अमर सिपाही, खुद को गोली मारी। अंग्रेजों के हाथ न आया, आज़ादी भी व्यारी।
वैज्ञानिक उपकरण हमारे काम को सुविधाजनक ढंग से सम्पन्न कराने में सहायक होते हैं। जिन वैज्ञानिक उपकरणों पर पहेलियाँ लिखी गयी हैं, वे हैं:- बल्ब, थर्मामीटर, लालटेन, घड़ी, पैराशूट, फोन, ताला, टैंक, एक्स-रे, कम्प्यूटर, चुक्क, माइक, पंखा, प्रेशर कुकर, कैंची, टीवी, हेलमेट, डिश एंटीना तथा कुलर ।
'कम्प्यूटर' पर लिखी घमंडीलाल अग्रवाल की पहेली देखिए:-एक मशीन इलेक्ट्रानिक है, बिजली से मैं चलता। चित्र बीचता, खेल दिखाता, गणनाएँ हूँ करता।
खाद्य-पदार्थों की पहेलियां इस संग्रह की शोभा बनी हैं, जैसे:- भुट्टा, गन्ना, पपीता, रसगुल्ला, नमक, नारियल, मटर, गाजर, करेला,गजक, मूंगफली, लीची, गुझिया, मिर्च, केला, लड्डू, आम, संतरा, दूध, भिंडी, नींबू, पालक, मक्खन, लीची, बैंगन, आलू, खड़ी, इलायची, मूली, केला आदि। 'गाजर' पर लिखी कमला गर्ग की पहेली प्रस्तुत है:-पत्ते नहीं जड़ खाई जाती, सर्दी में वह बिकने आती। नारंगी है उसका रूप, चाहें उसे रंक और भूप।
कुछ उपयोगी वस्तुएं है:- दिया, बस्ता, गुब्बारा, रबर, अगरवत्ती, पेन, बटन, नाव, कैरमबोर्ड, ताश के पत्ते, अलगनी, नाव, पुस्तक, तबला, काजल, माचिस, हीरा, कुर्सी, मच्छरदानी, कुप्पी, मेहंदी, चोटी, तकिया, आरना, चरमा आदि। इन पर भी पहेलियों का स्टजन किया गया है। एक पहेली देखिए 'पेन' पर, जिसे लिखा है प्रदीप पंकज ने :-चलता है पर पैर नहीं, बोली मेरो नाम । सीधा-साथा उत्तर दो झट कर मत देना शाम ।
प्रकृति से संबंधित कुछ पोतियाँ भी देखने को मिलती है, जैसे:- आकाश, तारे, बादल, वृक्ष, सूरज, भरती, इन्द्रधनुष, आँधी, हवा, ओला, चंदा, रात, पर्वत, अंधेरा आदि। अजय शर्मा द्वारा लिखित 'तारे' की पहेली देखिए:-दिन में मैं जो जाऊँ नज़र रात में आऊँ। शक्ल हमारी भोली, खेलूँ आँख मिचौली।
यातायात के साधन हैं:- रेलगाड़ी, हवाईजहाज, साइकिल, पैराशूट, मोटर आदि। एक पहेली 'हवाईजहाज' की देखिए, जिसे लिखा है अंजीव 'अंजुम' ने :- दौड़े पहले भूमि पर, उड़ता फिर आकाश। कौन कराता सैर है हमको बादल पास।
नगर और महानगर भी पहेलियों के विषय बने हैं, जैसे:- भारत, सोनार, मथुरा, नालन्दा, अहमदनगर, मसूरी, अण्डमान निकोबार, मलयालम, दार्जिलिंग!
'दार्जिलिंग' पर जगदीश तोमर की पहेली यों है:-हम भारत के लोग सूर्य को, सबसे पहले वहीं देखते। उत्तर-पूरव की नगरी वह, बोलो, उसको क्या कहते हम ?
शरीर के अंगों (नाखून, पाँव, जीभ, आँसू), रिश्ते-नाती (चाचाजी, मामाजी के अतिरिक्त फुटकर विषयों पर भी पहेलियां है।
ये पहेलियों सरल भाषा में लिखी होने के कारण बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी अपनी ओर आकर्षित करेगी। इनसे उनका भरपूर मनोरंजन तो होगा ही, ज्ञानवर्धन होना भी लाजमी है। डॉ. नागेश पांडेय' संजय' की यह मेहनत व साधना रंग लाएगी, ऐसा मेरा विश्वास है। संपादक को ढेरों बधाई।
कृति : श्रेष्ठ बाल पहेलियाँ
संपादक: डॉ नागेश पांडेय' सजय'
प्रकाशक : विद्यार्थी प्रकाशन, लखनऊ
समीक्षक : डॉ. घमंडीलाल अग्रवाल 785/8, अशोक विहार, गुड़गाँव-122006 (हरि)

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