पुस्तक समीक्षा
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| बाल वाणी, जनवरी-फरवरी, 2014, पृष्ठ 62 |
बाल साहित्य सृजन और समीक्षा
समीक्षक : योगीन्द्र द्विवेदी
इसमें दो राय नहीं कि हिन्दी बाल साहित्य अब प्रौढ़ हो चुका है और इसी अनुपात में इससे सम्बन्धित समीक्षा पुस्तकों की भी कमी नहीं है, तो भी सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डॉ. नागेश पाण्डेय 'संजय' की यह पुस्तक अपनी समूची प्रस्तुति में अलग छाप छोड़ती है। लगभग सौ पृष्ठों की यह पुस्तक 14 अध्यायों में विभाजित है और इनमें अत्यंत संक्षेप और सरल भाषा में सम्बन्धित विषयों को समझाने का सराहनीय प्रयास किया गया है। इनमें से कुछ अध्याय यहां उल्लेखनीय हैं हिन्दी की पहली बाल कहानी, बाल कविताएं: वाह वाह, किशोर साहित्य: कल और आज, बालिकाओं के लिए साहित्य, बाल पहेलियों के विकास यात्रा, बाल साहित्य में अनुसंधान, बाल साहित्य और इंटरनेट तथा बाल साहित्य के समक्ष चुनौतियां आदि। पुस्तक के कुछ अध्याय यदि न होते जो ज्यादा बेहतर होता, मसलन बाल साहित्य में चौर्यवृत्ति और बाल साहित्य में अनुसंधान आदि। इनकी चर्चा सम्बन्धित अन्य अध्यायों में आसानी से हो सकती थी। समग्रता में पुस्तक 'बाल साहित्य, सृजन और समीक्षा' अत्यंत उपयोगी है और इसके विषय में सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार विनोद चन्द्र पाण्डेय 'विनोद' ने ठीक ही कहा है कि लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से बाल साहित्य समीक्षा के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उल्लेखनीय है कि डॉ. नागेश पाण्डेय 'संजय' के कई बाल कहानी संग्रह, बाल कविता संग्रह, और किशोरों आदि के लिए उपयोगी अनेकानेक पुस्तकें प्रकाशित हैं। इस सृजनशील परम्परा को यह पुस्तक और आगे बढ़ाती है।
पुस्तक : बाल साहित्य, सृजन और समीक्षा
लेखक : डा. नागेश पाण्डेय 'संजय'
पृष्ठ : 99
मूल्य : रु. 200-00
प्रकाशक विनायक पब्लिकेशन, 53/50, चाहचंद (जीरो रोड), इलाहाबाद-211003
समीक्षक : योगीन्द्र द्विवेदी

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