हमारे सम्मान्य समर्थक... हम जिनके आभारी हैं .

शनिवार, 20 नवंबर 2010

पुस्तक समीक्षा/ बाल साहित्य के प्रतिमान, समीक्षक : विनोद चंद्र पांडेय विनोद

पुस्तक-समीक्षा 
बालसाहित्य के प्रतिमान : एक श्रेष्ठ संदर्भ ग्रंथ 
विनोदचंद्र पांडेय 'विनोद'

संप्रति हिंदी बालसाहित्य की विविध विधाओं का व्यापक, सर्वांगीण एवं श्रेष्ठ विकास हो रहा है। बाल-रचनाकार बाल-कविता, बाल-कहानी, बाल-नाटक, बाल-उपन्यास, बाल-जीवनी, बाल-पहेली आदि विविध विधाओं में सृजन कर बाल साहित्य की निरंतर सम्यक् समृद्धि के लिए प्रयत्नशील हैं। बाल-साहित्य-समीक्षा हिंदी बालसाहित्य की एक प्रमुख विधा है। इस क्षेत्र में भी समीक्षकों का योगदान प्रशंसनीय है। बाल साहित्य-समीक्षा संबंधी अनेक ग्रंथों का लेखन और प्रकाशन हो चुका है। इसी श्रृंखला में सुधी समीक्षक, सुयोग्य प्रवक्ता और सफल बाल-साहित्यकार की कृति 'बालसाहित्य के प्रतिमान' को एक सुदृढ़ कड़ी के रूप में मान्यता प्राप्त होगी।
पुस्तक को तीन खंडों में विभक्त किया गया है 1. अभिज्ञान, 2. प्रतिमान, 3. अनुमान । अभिज्ञान के अंतर्गत बालसाहित्य मतलब, बालसाहित्य समीक्षा का स्वरूप, बालसाहित्य समीक्षा की विकास-यात्रा, बालसाहित्य समीक्षा के प्रमुख स्तंभ शीर्षक अध्याय सम्मिलित किए गए हैं। प्रतिमान के अंतर्गत बाल-काव्य के प्रतिमान, बाल कथा-साहित्य के प्रतिमान, बाल-नाटक के प्रतिमान तथा अन्य विधाओं के प्रतिमान शीर्षक अध्यायों का समावेश है। अनुमान खंड के अंतर्गत बाल-साहित्य का भविष्य शीर्षक अध्याय समाविष्ट है।
खंडों और अध्यायों के शीर्षकों से बाल-साहित्य समीक्षा के व्यापक और विस्तृत विषय वैविध्य का आभास मिलता है। स्वयं लेखक का निम्नलिखित कथन पूर्णतया समीचीन और सारगर्भित प्रतीत होता है-
'ऐसी पुस्तक की एक लंबे समय से आवश्यकता उ‌द्घाटित की जा रही थी, जिसमें विस्तारपूर्वक बाल-साहित्य के प्रतिमानों का सोदाहरण विवेचन हो। प्रस्तुत पुस्तक की रचना इसी दिशा में एक विनम्र और अनंतिम प्रयास है। मैंने बिना किसी पूर्वाग्रह के समय-समय पर बालसाहित्य के विद्वानों, लेखकों, समीक्षकों, संपादकों, अनुसंधित्सुओं द्वारा व्यक्त महत्त्वपूर्ण मंतव्यों तथा प्रणीत मानकों का आश्रय लेते हुए बाल साहित्य के क्षेत्र में प्रचलित प्रायः सभी विधाओं के प्रतिमान प्रस्तुत करने की चेष्टा की है।'
निस्संदेह डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' को बाल साहित्य के क्षेत्र में प्रचलित प्रायः सभी विधाओं के प्रतिमान प्रस्तुत करने में वांछित सफलता प्राप्त हुई है।
संजय जी ने सभी विचारणीय विषयों का विवेचन कुशलतापूर्वक किया है। उन्हें बाल-साहित्य के विविध पक्षों का विशेष ज्ञान है। वह बाल-मनोविज्ञान, बाल-प्रकृति, बाल-स्वभाव और बालरुचि के भी मर्मज्ञ हैं। बाल-साहित्य का उन्होंने गहन अध्ययन
गंभीरतापूर्वक किया है तथा वह स्वयं भी बाल साहित्य की विविध विधाओं के समर्थ और सक्षम रचनाकार हैं। अतः इन विशेषताओं का अनुपम प्रभाव उनके श्रेष्ठ लेखन में परिलक्षित होता है। सूक्ष्मातिसूक्ष्म विश्लेषण की कला में उन्हें कौशल प्राप्त है।
डॉ. नागेश पांडेय ने सरल, सुबोध, परिष्कृत, प्रांजल एवं परिनिष्ठित भाषा का प्रयोग किया है। भाषा विचारानुकूल एवं विषयानुकूल होने के कारण सहज संप्रेषणीय हो गई है। उनकी लेखनशैली तो आकर्षक है ही, उनके प्रस्तुतीकरण का ढंग भी उत्तम है।
उनके समीक्षा-ग्रंथ के संबंध में लब्धप्रतिष्ठ बाल-साहित्यकार प्रकाश 'मनु' का अभिमत यथार्थ एवं तथ्यपरक है, 'खुशी की बात यह है कि डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' की दृष्टि खुली है तथा बाल-साहित्य के विविध विवेचकों, विश्लेषकों और आलोचकों में से किसी एक के प्रति झुकाव प्रदर्शित किए बिना, उन्होंने उपलब्ध सामग्री और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालने और उन्हें संयत, निरपेक्ष ढंग से कहने में दिलचस्पी ली है। इस लिहाज से उनके इस ग्रंथ की सफलता असंदिग्ध है। बाल साहित्य के प्रतिमानों पर चूँकि काम अभी हुआ ही नहीं है और डॉ 'नागेश' ने अपने शोध के जरिए इस क्षेत्र में पहलकदमी की है, इसलिए उनका काम महत्त्वपूर्ण है। बाल साहित्य के पुरोधा डॉ. राष्ट्रबंधु का विचार भी सत्य पर आधारित है-'डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' ने... सालों जुटे रहकर बाल साहित्य का अनुशीलन किया, उन्होंने प्रतिमान तैयार किए, क्योंकि साहित्य के प्रतिमानों से काम नहीं चल रहा था।
उन्होंने बाल साहित्य की बहुत बड़ी सेवा की है।
डॉ. नागेश पांडेय 'संजय' द्वारा लिखित 'बालसाहित्य के प्रतिमान' बालसाहित्य के प्रणेताओं, जिज्ञासुओं, इतिहासकारों, विद्यार्थियों, शोद्यार्थियों और समीक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। ऐसा श्रेष्ठ संदर्भ ग्रंथ साहित्य जगत को भेंट करने के लिए 'संजय' जी हार्दिक बधाई के पात्र हैं। आशा ही नहीं, अपितु पूर्ण विश्वास है कि इस कृति का यत्र-तत्र-सर्वत्र सहर्ष स्वागत होगा। ग्रंथ की उपयोगिता निर्विवाद है।
बाल-साहित्य के प्रतिमान; डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'; प्रथम संस्करण 2009; 
मूल्य 300 रुपए; 
प्रकाशक : बुनियादी साहित्य प्रकाशन, रामकृष्ण पार्क अमीनाबाद, लखनऊ (उ०प्र०)


(शोध दिशा, बिजनौर, जुलाई-दिसंबर 2009, पृष्ठ : 289 में प्रकाशित)

2 टिप्‍पणियां:

अभिषेक ने कहा…

बधाई. कृपया इस पुस्तक के बारे में और अधिक जानकारी प्रकाशित करें .

manita rasaily ने कहा…

sir how can i get this book?