पुस्तक समीक्षा
अलग अलग रंगों की नटखट कहानियाँ
समीक्षक : कमलेश पांडेय पुष्प
बाल कहानियाँ बचपन की जीवंत तस्वीरों के साथ ही बाल सुलभ जिज्ञासा से जुड़ेे अनेक प्रसंगों को पाठकों समक्ष प्रस्तुत करती हैं। प्रस्तुत बाल कहानी संग्रह में कुल 28 कहानियाँ हैं। प्रत्येक कहानी में अलग-अलग रंग दृष्टिगत होते हैं। इनमें विज्ञान, पर्यावरण सुरक्षा, राष्ट्रीय भावना के साथ ही त्यौहारों का आनंद व मन को गुदगुदाने वाला हास्य बहुत ही सरल अंदाज में समाहित किया गया है। पहली कहानी ‘खेल-खेल में’ बाल मनोविज्ञान को बड़े ही सहज भाव से चित्रित किया गया है। अपनी बहन नेहा को परेशान करने के लिए उसका भाई राजू उसकी चप्पल को गुड़हल के पेड़ के नीचे छुपा देता है। जब वह उसे लेने जाती है तो वहाँ साँप देखकर बेहोश हो जाती है, जबकि सभी को भ्रम होता है कि साँप ने उसे काट लिया है। बच्चों के आपसी हँसी-मजाक कभी-कभी कैसे जानलेवा हो जाते हैं इसका सटीक चित्रण है इस कहानी में। कहानी ‘उड़न तश्तरी’ ऐसी सीख भरी है कि बच्चों को फालतू कामों से दूर रहकर प्रेम से रहने और नित नई सोच को विकसित कर नये काम करने की प्रेरणा देती है। संग्रह की कहानियों की भाषा सरल व शब्द संख्या संक्षिप्त रखने का भरपूर प्रयास किया है कहानीकार ने।
‘होली के गुब्बारे’ कहानी में सीटू नामक खरगोश की व्यथा का मार्मिक चित्रण है। जिसकी मां की दवा की शीशी होली के गुब्बारे फेंक कर खोंखों बंदर ने तोड़ दी। फिर सभी कैसे मदद कर उसकी मां के लिए दवा की व्यवस्था करते हैं यह घटना बच्चों को अच्छी सीख देती है। इसी प्रकार ‘ईद मुबारक’ कहानी हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों के लोगों को मिल-जुल कर रहने की सीख देती है। संग्रह की सभी कहानियों के शीर्षक बच्चों के मन को लुभाने वाले हैं और कहानी को पढ़ने की उत्सुकता में वृद्धि करते हैं। कहानी ‘मैं जाग रहा था’ में भाई-बहन सोनल और साहिल के आपसी झगड़े और फिर प्रेम के माध्यम से कहानीकार ने यह बताने का प्रयास किया है कि हँसी का वातावरण जब भी होता है प्रेम की बेल खिल ही जाती है। ‘चतुर मूर्तिकार‘ कहानी में बच्चों को यह उत्सुकता अंत तक रहती है कि आगे क्या होगा। मूर्तिकार अपनी चतुराई से राजा को कलाकारों की प्रतिभा का सम्मान करने को मजबूर कर देता है। कहानीकार ने इन कहानियों में जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए जगह-जगह प्रेरणाप्रद बातें कही हैं। जैसे कि डॉक्टर अंकल कहानी में पंक्ति है- ‘चढ़ना-उतरना ही जीवन है। पढ़ाई भी पहाड़ है, पढ़ाई की सीढ़ियाँ सतर्क होकर चढ़ो तो आगे विश्राम ही विश्राम है। सुख ही सुख है।’’
संग्रह की कहानियों में हास्य का पुट भी भरपूर है। ‘टेढ़ी खीर’ कहानी में सवालीराम के सवाल बच्चों को खूब हँसाते हैं, तो ‘चूहे के पेट में चूहे कूदे’ में कविता के रूप में चूहे और बिल्ला के संवाद को बहुत ही मनोरंजक तरीके से बताया गया है। कहानी ‘टिल्लू की पतंग’ में झंडे के तीन रंगों का प्रयोग करके उसे तिरंगा का रूप देना और उसे आसमान में उड़ाते समय बच्चों द्वारा गाया जाना- ‘झंडा उड़ता रहे हमारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा’ उनके मन में देशभक्ति की भावना का संचार करती है। इन कहानियों में बच्चों के लिये जो भी उपयुक्त प्रसंग कहानीकार के मन में उभरा है उसे समाहित करके सीख देने की कोशिश की है। भाषा का प्रयोग करते हुए कहानीकार बहुत सजग रहा है। बच्चों को गुदगुदाने वाली भाषा अच्छी लगती है, अतः ज्यादातर कहानियों के संवाद में इसे प्रयोग किया गया है। कहानी ‘शरारत’ में किशोर और विभोर जुड़वाँ भाइयों द्वारा एक-दूसरे के प्रति की गई शरारत को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। कहानी ‘यस सर! नो सर!’ में बच्चों द्वारा बोलने में हड़बड़ाहट की तरफ ध्यान आकृष्ट किया गया है, जो कि अक्सर गलत शब्दों को उच्चारित कर बैठते हैं, जैसे कि ‘यस सर’ की जगह ‘नो सर’।
कहानी ‘काल करे सो आज कर’ में बच्चों को अपना काम समय पर पूरा करने की शिक्षा एक नन्ही चींटी के माध्यम से दी गई है। इसी प्रकार कहानी ‘जेम्स का बर्थडे’ में उपहार स्वरूप जेम्स द्वारा पौधे दिया जाना पर्यावरण सुरक्षा के प्रति बच्चों को जागरूक करना है। कहानी ‘दीवाली और नयी भाभी’ में कहानीकार ने बच्चों के लिये एक सुखद वातावरण निर्मित करके शिक्षा, मनोरंजन एवं रिश्ते में अटूट प्यार, सबको एक साथ पिरो कर बच्चों के मन को लुभाने का सफल प्रयास किया है। संग्रह की अन्य कहानियाँ भी बच्चों के लिये संजीवनी तुल्य हैं। यदि बच्चे एकाग्र मन से इन कहानियों को पढ़ें तो निश्चय ही उनका जीवन खुशहाली से भर उठेगा और वे देश के श्रेष्ठ नागरिक बन सकेंगे।
समीक्षक : कमलेश पांडेय पुष्प
(राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका 'पुस्तक संस्कृति' के सितंबर-अक्टूबर 2023 अंक में प्रकाशित)
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