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गुरुवार, 18 नवंबर 2010

पुस्तक-समीक्षा/नेहा ने माफी मांगी, समीक्षक : डॉ. शोभनाथ 'लाल'

पुस्तक समीक्षा
एक सार्थक पुस्तक : नेहा ने माफी मांगी 
समीक्षक : डॉ. शोभनाथ 'लाल'

बाल साहित्य की अन्यान्य विधाओं में जितनी लोकप्रियता बालगीत तथा कहानी को प्राप्त है, उतनी अन्य को नहीं। खूब बालगीत छप रहे हैं, खूब कहानियां लिखी जा रही हैं। श्री नागेश पांडेय 'संजय' की प्रतिभा सम्पन्न लेखनी ने दोनों ही विधाओं में उपयोगी साहित्य का सृजन किया है।
बाल कहानी संग्रहों की भीड़-भाड़ में कभी-कभी ही कोई सार्थक, रचनात्मक एवं उपयोगी पुस्तक मिल जाती है। श्री 'संजय' की सद्यः प्रकाशित पुस्तक 'नेहा ने माफी मांगी' एक ऐसी ही सार्थक कृति है। इस पुस्तक मे कुल छह कहानियाँ हैं, जिनकी भाषा, शिल्प तथा शैली से लेखक की पहचान पुष्ट होती है। भाव तथा कला दोनों ही पक्ष समृद्ध है। बाल मनोविज्ञान की सूक्ष्म दृष्टि भी परीलक्षित होती है।
"संग्रह की पहली कहानी 'खेल-खेल में' है। कभी कभी खेल-खेल में ही बच्चों की शैतानी बड़े संकट का कारण बन जाती है। इस कहानी में राजू को जब आसन्न संकट से अपनी शैतानी का बोध होता है तो वह इस आदत को हमेशा के लिए छोड़ देता है। दूसरी कहानी 'अंधेरा हट गया' में कुछ छोटे बच्चों ने अपने एक अंधे मित्र की रोशनी वापस लौटा लेने में वह सहयोग किया कि संवेदनहीन होते हुए 'आदमी' के लिए भी यह असंभव और आश्चर्यजनक कार्य होता। 'देखा तो चौकी' कहानी में धनी बच्चों के सहानुभूतिपूर्ण भावनाएं को गरीब सहपाठियों के संदर्भ में उकेरा गया है। 'जल्दी चलिए वहां' कहानी में मोहनीश की सूझबूझ से पूरी बस के यात्रियों को आतंकियों के चंगुल से बचा लिया जाता है। 'नेहा ने माफी मांगी' कहानी भी कम रोचक और शिक्षाप्रद नहीं है। नेहा भी अपनी सहेली छात्राओं को बराबर तंग किया करती थी। किन्तु जब वह स्वयं मुसीबत में डाल दी गई तो उसे अपने किए का दूसरों पर पड़ने वाले प्रभाव का एहसास हुआ। सो वह भी सुधर गयी। 'खेल-खेल में' तथा इस कहानी के थीम एक से हैं। 'मैं जान गया हूं' कहानी में एक साधनहीन परिवार में जन्में बालक की जिद व हठ को मनोवैज्ञानिक ढंग से दूर करने का सफल प्रयास है।
कुल मिलाकर यह पुस्तक नौ से बारह वर्षीय बालकों के लए उपयोगी है। मुद्रण तथा एकरंगे चित्र अच्छे हैं। आवरण पृष्ठ संतोष जनक है।

पुस्तकः - नेहा ने माफी मांगी
लेखकः - नागेश पांडे 'संजय'
प्रकाशकः - राही प्रकाशन, चौकसी, शाहजहांपुर-२४२००१
मूल्य : दस रुपया मात्र, संस्करण : 1994, प्रथम
पृष्ठ :- तीस

(देवपुत्र, मासिक, मार्च 1996, पृष्ठ 34)


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