बालगीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय '
कापी और किताब निकालो,
पढ़ा-लिखा फिर से दोहरा लो,
नहीं चूक अब करो तनिक-
ये पढ़ने के दिन हैं।
नई-नई कक्षा में भइया
बढ़ने के दिन हैं।
खूब लगन से पढ़कर ही तो,
अच्छे नम्बर पाओगे,
अच्छे नम्बर पाकर ही तो
अच्छे छात्र कहाओगे।
अपनी किस्मत को भइया
खुद गढ़ने के दिन हैं।
नहीं चूक अब करो तनिक
ये पढ़ने के दिन हैं।
नींद कहेगी सोओ, तुमसे
खेल कहेगा, खेलो,
और कहेगा मन टाइम है ,
तब तक घूमो टहलो।
इन सारी बाधाओं से ही
लड़ने के दिन हैं।
नहीं चूक अब करो तनिक
ये पढ़ने के दिन हैं।
चित्र : गूगल सर्च से साभार

बहुत सुन्दर...
जवाब देंहटाएंhttp://bachhonkakona.blogspot.com/
सुंदर रचना ...
जवाब देंहटाएंअच्छी लगी पढ्ने की कविता
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी शिक्षा देती सुन्दर कविता के लिए धन्यवाद !
जवाब देंहटाएंप्रेरक बाल गीत .
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