बालसाहित्य सृजन
डॉ.नागेश पांडेय 'संजय' का बालसाहित्य संसार
सोमवार, 22 नवंबर 2010
हुर्र... फुर्र..
एक चिड़ैया ,
बड़ी गवैया .
नाचा करती ,
ता ता थैया .
लेकिन जब मैं
करता हुर्र .
वह झट से ,
उड़ जाती फुर्र
.
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