बालसाहित्य सृजन
डॉ.नागेश पांडेय 'संजय' का बालसाहित्य संसार
रविवार, 28 नवंबर 2010
तारे निकले
आसमान
में
तारे
निकले .
देखो कितने
सारे निकले
.
टिम-टिम
करते
आते हैं.
अंधकार
को
खाते हैं .
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणी के लिए अग्रिम धन्यवाद . आपका आभार .
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणी के लिए अग्रिम धन्यवाद . आपका आभार .