बालसाहित्य सृजन
डॉ.नागेश पांडेय 'संजय' का बालसाहित्य संसार
शनिवार, 27 नवंबर 2010
काश
चार दिनों के बाद मुझे
नाना के घर जाना .
और चार दिन रहकर , घर को
वापस है आना .
काश ! चार के आगे भैया
जीरो बढ़ जाता .
नाना जी के घर रहने का
मजा खूब आता .
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