बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

शिशुगीत : दादीजी का चश्मा

दादीजी का चश्मा खोया ,
                                 सबकी आफत आई .                                        

सब मिल खोज रहे हैं फिर भी
पड़ा नहीं दिखलाई .
दादी अपने सर पर देखो ,
मीना जब चिल्लाई .
राम राम फिर गजब हो गया
दादीजी शरमाई .

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    यहाँ पर ब्रॉडबैंड की कोई केबिल खराब हो गई है इसलिए नेट की स्पीड बहत स्लो है।
    सुना है बैंगलौर से केबिल लेकर तकनीनिशियन आयेंगे तभी नेट सही चलेगा।
    तब तक जितने ब्लॉग खुलेंगे उन पर तो धीरे-धीरे जाऊँगा ही!

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  2. bahut sundar baalgeet...
    mujhe bhi baalgeet bahut pasand hain.. 2-4 baal rachnayen likhi thi lekin aage nahi likh sake.. thoda kathin sa jaan padta hai...
    bahut badiya saarthak prastuti ke liye aabhar!

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